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विद्युत रूप से रिचार्ज होने वाली जिंक-एयर बैटरी के लिए नई तकनीक विकसित (UPSC/RAS/PSI)

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तिथि: 24 जुलाई 2026

चर्चा में क्यों?

  • भारत के सास्त्रा डीम्ड विश्वविद्यालय, तंजावुर के वैज्ञानिकों ने विद्युत रूप से रिचार्ज होने वाली जिंक-एयर बैटरी के लिए एक नया नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट विकसित किया है। यह तकनीक बैटरी की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उसे अधिक सुरक्षित, कम लागत वाली एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाती है। इस तकनीक को भारतीय पेटेंट (IN570691) प्राप्त हो चुका है और यह व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार है।

प्रमुख बिंदु

  •  वैज्ञानिकों ने सामान्य इलेक्ट्रोलाइट में सिलिका (SiO₂) एवं जिंक ऑक्साइड (ZnO) के नैनोकण मिलाकर नया नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट विकसित किया।
  •  यह इलेक्ट्रोलाइट 3 महीने से अधिक समय तक स्थिर रहता है।
  •  यह जिंक के क्षरण (Corrosion) को कम करता है तथा अनावश्यक हाइड्रोजन गैस बनने से रोकता है।
  •  इससे कैथोड पर ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया तेज होती है, जिससे बैटरी की दक्षता बढ़ती है।
  •  तकनीक ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण एवं इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए उपयोगी है।

शोध की प्रमुख उपलब्धियाँ

  •  डॉ. एस. देवराज के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने बैटरी की दो प्रमुख समस्याओं का समाधान किया—
  1.  जिंक एनोड का क्षरण एवं हाइड्रोजन गैस का निर्माण।
  2.  वायु कैथोड पर ऑक्सीजन अभिक्रिया की धीमी गति।
  •  शोध में α-MnO₂ को सर्वश्रेष्ठ द्विकार्यात्मक उत्प्रेरक पाया गया।
  •  इसमें केवल 2% तांबा (Cu) मिलाने से इसका प्रदर्शन प्लैटिनम एवं रूथेनियम जैसे महंगे उत्प्रेरकों से भी बेहतर पाया गया।
  •  उपयोग किए गए वॉटर प्यूरीफायर के सक्रिय कार्बन से MnO₂/C नैनोकॉम्पोजिट विकसित किया गया।
  •  प्रयुक्त सर्जिकल फेस मास्क को पुनर्चक्रित कर उच्च सतह क्षेत्र वाला सक्रिय कार्बन तैयार किया गया, जिसकी ऑक्सीजन अपचयन क्षमता प्लैटिनम के समान पाई गई।
  •  इस पुनर्चक्रण तकनीक के लिए पेटेंट आवेदन संख्या 202441032753 दायर की गई है।

महत्व

  •  सुरक्षित एवं कम लागत वाली ऊर्जा भंडारण तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।
  •  लिथियम-आयन बैटरियों का बेहतर विकल्प विकसित होगा।
  •  भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन एवं ई-मोबिलिटी को गति मिलेगी।
  •  अपशिष्ट पदार्थों के पुनर्चक्रण से सर्कुलर इकोनॉमी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

संभावित प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) प्रश्न

प्रश्न 1. हाल ही में विकसित नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग किस प्रकार की बैटरी में किया जाएगा?

(A) लिथियम-आयन बैटरी
(B) सोडियम-आयन बैटरी
(C) जिंक-एयर बैटरी
(D) लेड-एसिड बैटरी

उत्तर: (C)

प्रश्न 2. जिंक-एयर बैटरी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1.  यह जल-आधारित (Aqueous) रसायन पर आधारित बैटरी है।
  2.  इसमें विकसित नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट जिंक के क्षरण को कम करता है।
  3.  यह तकनीक केवल छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए उपयोगी है।

नीचे दिए गए कूट का सही उत्तर चुनिए—

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

उत्तर: (A)

मुख्य परीक्षा (Mains) प्रश्न

Q.) "जिंक-एयर बैटरियाँ भारत की स्वच्छ ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। नवीन नैनोफ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट तकनीक के संदर्भ में इसके लाभ एवं चुनौतियों की विवेचना कीजिए।" (150 शब्द)

स्रोत: PIB