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आदित्य-L1 एवं चंद्रयान-3 की उपलब्धियाँ: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाई (UPSC/RAS/PSI)

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तिथि: 23 जुलाई 2026

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में आदित्य-L1 एवं चंद्रयान-3 मिशनों की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन मिशनों ने भारत को उच्च-स्तरीय अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित किया है तथा भविष्य के शुक्र ऑर्बिटर मिशन, चंद्रयान-4 और लूपेक्स (LUPEX) जैसे अभियानों के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।

आदित्य-L1 मिशन: प्रमुख उपलब्धियाँ

  • आदित्य-L1 सूर्य-पृथ्वी L1 (Lagrange Point-1) पर स्थित भारत की पहली सौर वेधशाला (Solar Observatory) है।
  • इसने पहली बार कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के प्रारंभिक चरण के स्पेक्ट्रोस्कोपिक संकेत दर्ज किए।
  • मई एवं अक्टूबर 2024 के भू-चुंबकीय तूफानों (Geomagnetic Storms) का विस्तृत अध्ययन किया।
  • Photospheric Iron Fluorescence का पहला व्यापक विश्लेषण किया।
  • निकट-अल्ट्रावायलेट (NUV) में उच्च-रिज़ॉल्यूशन सौर ज्वालाओं एवं दुर्लभ सौर प्लाज़्मा निष्कासन का अवलोकन किया।
  • मिशन से प्राप्त सभी प्रमुख परिणाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

महत्व

  • सूर्य के व्यवहार एवं सूर्य–पृथ्वी संबंध को समझने में सहायता।
  • भविष्य में अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) के बेहतर पूर्वानुमान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान।
  • भारत की गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) मिशनों की क्षमता में वृद्धि।

चंद्रयान-3: प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

  • चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतरने वाला अब तक का एकमात्र मिशन।
  • ChaSTE ने पहली बार चंद्र सतह के नीचे 10 सेमी तक तापमान का प्रत्यक्ष मापन किया।
  • चंद्र रेगोलिथ (Lunar Regolith) की दो-परत (Two-layer) संरचना का पता चला।
  • APXS ने मैग्नीशियम-समृद्ध खनिजों की पहचान की, जिससे Lunar Magma Ocean (LMO) परिकल्पना को समर्थन मिला।
  • RAMBHA-LP ने पहली बार चंद्र दक्षिणी ध्रुव के निकट सतही प्लाज़्मा का अध्ययन किया।
  • ILSA सीस्मोमीटर ने 250 से अधिक चंद्र कंपन (Moonquakes/Seismic Events) दर्ज किए।

भविष्य के मिशनों में योगदान

  • आदित्य-L1 एवं चंद्रयान-3 से प्राप्त तकनीकी अनुभव निम्नलिखित मिशनों में उपयोगी होंगे—
  • शुक्र ऑर्बिटर मिशन (Venus Orbiter Mission)
  • चंद्रयान-4 (नमूना वापसी मिशन)
  • चंद्रयान-5 / LUPEX (Lunar Polar Exploration Mission)
  • भविष्य के ग्रह एवं गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण मिशन

परीक्षा की दृष्टि से तथ्य (Prelims Facts)

  • आदित्य-L1: भारत का पहला सौर मिशन
  • स्थान: सूर्य–पृथ्वी L1 लैग्रेंज बिंदु
  • मुख्य अध्ययन: सूर्य, सौर कोरोना, सौर पवन एवं अंतरिक्ष मौसम
  • चंद्रयान-3 लैंडिंग स्थल: शिव शक्ति बिंदु
  • ChaSTE: तापीय प्रोब
  • APXS: Alpha Particle X-ray Spectrometer
  • RAMBHA-LP: Langmuir Probe
  • ILSA: Instrument for Lunar Seismic Activity
  • LUPEX: Lunar Polar Exploration Mission

संभावित प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) प्रश्न

प्रश्न 1. आदित्य-L1 मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(A) मंगल ग्रह का अध्ययन
(B) सूर्य का अध्ययन
(C) चंद्रमा की सतह का अध्ययन
(D) क्षुद्रग्रहों का अध्ययन

उत्तर: (B)

प्रश्न 2. चंद्रयान-3 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

1. ChaSTE उपकरण चंद्र सतह के तापमान का अध्ययन करता है।
2. APXS उपकरण चंद्र सतह की रासायनिक एवं तत्वीय संरचना का विश्लेषण करता है।
3. RAMBHA-LP चंद्रमा के निकट सतही प्लाज़्मा का अध्ययन करता है।

नीचे दिए गए कूट का सही उत्तर चुनिए—

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3

उत्तर: (D)

मुख्य परीक्षा (Mains) प्रश्न

Q.) "आदित्य-L1 एवं चंद्रयान-3 मिशनों की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।" इस कथन की विवेचना कीजिए। (150 शब्द)

स्रोत: PIB