उत्तर-
- अनुच्छेद 21 केवल जीवित रहने का अधिकार नहीं, बल्कि गरिमा (Dignity) के साथ जीने एवं उपयुक्त परिस्थितियों में गरिमापूर्ण मृत्यु (Dignified Death) का भी संरक्षण करता है। (Maneka Gandhi, Common Cause)
| अनुच्छेद 21 |
⬇️
|
गरिमापूर्ण जीवन
|
| गरिमापूर्ण मृत्यु |
⬇️
| निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) + Living Will (वैध) |
सर्वोच्च न्यायालय का दृष्टिकोण
1. P. Rathinam (1994)
- आत्महत्या के अधिकार को अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना।
2. Gian Kaur (1996)
- निर्णय पलटा।
- आत्महत्या का अधिकार ≠ अनुच्छेद 21
- लेकिन गरिमापूर्ण प्राकृतिक मृत्यु को स्वीकार किया।
3. Aruna Shanbaug (2011)
- पहली बार Passive Euthanasia को सीमित परिस्थितियों में अनुमति।
4. Common Cause (2018)
- Living Will को वैध माना।
- गरिमापूर्ण मृत्यु को अनुच्छेद 21 का अभिन्न अंग घोषित किया।
5. Common Cause (2023)
- Living Will की प्रक्रिया सरल की।
- चिकित्सा निर्णयों को अधिक व्यावहारिक बनाया।
हाल का सोनम वांगचुक प्रकरण
- प्रकरण ने भूख हड़ताल, राज्य की जिम्मेदारी और व्यक्ति की गरिमा के बीच संतुलन का प्रश्न उठाया।
- यह स्पष्ट करता है कि राज्य का कर्तव्य जीवन की रक्षा करना है, परंतु यह संरक्षण व्यक्ति की गरिमा एवं स्वायत्तता के अनुरूप होना चाहिए।
- इसलिए अनुच्छेद 21 केवल जैविक अस्तित्व नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन एवं मृत्यु दोनों की संवैधानिक सुरक्षा देता है।
⇒ अतः अनुच्छेद 21 आत्महत्या का अधिकार नहीं, बल्कि न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार को संरक्षण प्रदान करता है।