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भारतीय मूल के खगोल वैज्ञानिक रोहन नायडू की बड़ी खोज: प्रारंभिक ब्रह्मांड में मिला ‘ब्लैक होल स्टार’ (UPSC/RAS/PSI)

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चर्चा में क्यों? 

  • भारतीय मूल के खगोल वैज्ञानिक डॉ. रोहन पी. नायडू के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने प्रारंभिक ब्रह्मांड में एक असामान्य खगोलीय पिंड की पहचान की है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘ब्लैक होल स्टार नाम दिया है। इस खोज से प्रारंभिक ब्रह्मांड में महाविशाल ब्लैक होल के निर्माण और तीव्र विकास को समझने में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। 
  • यह अध्ययन 12 अगस्त 2026 को Nature पत्रिका में प्रकाशित हुआ। शोध में NASA के James Webb Space Telescope (JWST) से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।

क्या है ‘ब्लैक होल स्टार’?

  •  वैज्ञानिकों ने इस खगोलीय पिंड को MoM-BH-1* नाम दिया है। यह सामान्य तारे जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसके प्रकाश और स्पेक्ट्रम का विश्लेषण बताता है कि इसके केंद्र में एक विशाल ब्लैक होल हो सकता है, जो अत्यधिक घने गैस के आवरण से घिरा हुआ है।
  • इस घने गैसीय आवरण के कारण ब्लैक होल की ऊर्जा एक चमकीले तारे जैसी दिखाई देती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका आकार लगभग सौरमंडल के स्तर का हो सकता है, जबकि इसके केंद्र में स्थित ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से लाखों गुना अधिक हो सकता है। 

बिग बैंग के सिर्फ 66 करोड़ वर्ष बाद का दृश्य 


  • MoM-BH*-1 से प्राप्त प्रकाश उस समय का है जब बिग बैंग के लगभग 66 करोड़ वर्ष बाद ब्रह्मांड अस्तित्व में था। इसका अर्थ है कि JWST ने ब्रह्मांड के अत्यंत प्रारंभिक चरण की झलक देखी है। 
  • शोध के अनुसार यह वस्तु पृथ्वी से अत्यंत दूर स्थित है और इसका प्रकाश अरबों वर्षों की यात्रा के बाद हमारे पास पहुंचा है। 

Little Red Dots’ का रहस्य सुलझाने में मदद 

  • James Webb Space Telescope ने प्रारंभिक ब्रह्मांड में बड़ी संख्या में छोटे और अत्यधिक लाल दिखाई देने वाले पिंडों की पहचान की है, जिन्हें वैज्ञानिकों ने ‘Little Red Dots’ (LRDs) नाम दिया है। 
  • इनकी वास्तविक प्रकृति लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बनी हुई है। MoM-BH*-1 की खोज इस संभावना को मजबूत करती है कि इनमें से कुछ लाल बिंदु घने गैस के आवरण में छिपे तेजी से बढ़ते ब्लैक होल हो सकते हैं। 

रोहन नायडू कौन हैं? 

  • रोहन पी. नायडू भारतीय मूल के खगोल वैज्ञानिक हैं और प्रारंभिक आकाशगंगाओं तथा ब्लैक होल के निर्माण पर शोध करते हैं। वे इस Nature अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं। 
  • रोहन नायडू ने 18 वर्ष की उम्र में इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड के अध्ययन की दिशा में अपना करियर आगे बढ़ाया। बाद में उन्होंने हार्वर्ड में पीएचडी की और अपने शोध के माध्यम से प्रारंभिक ब्रह्मांड को समझने में योगदान दिया। वर्तमान खोज ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में विशेष चर्चा में ला दिया है। 

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज? 


  • ब्रह्मांड के केंद्रों में पाए जाने वाले महाविशाल ब्लैक होल का निर्माण वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से एक महत्वपूर्ण प्रश्न रहा है। समस्या यह है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में ही कुछ ब्लैक होल का द्रव्यमान अरबों सौर द्रव्यमान तक कैसे पहुंच गया। 
  • MoM-BH*-1 जैसे पिंड इस प्रक्रिया की शुरुआती अवस्था को समझने में मदद कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार यह एक तेजी से बढ़ते ब्लैक होल का ऐसा चरण हो सकता है, जिसमें वह अत्यधिक घने गैस के आवरण में घिरा हुआ है। 

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य 


  • खगोलीय पिंड: MoM-BH*-1
  • प्रस्तावित नाम: ब्लैक होल स्टार
  • प्रमुख वैज्ञानिक: डॉ. रोहन पी. नायडू
  • अध्ययन प्रकाशित: 12 अगस्त 2026
  • शोध पत्रिका: Nature
  • प्रमुख उपकरण: James Webb Space Telescope (JWST)
  • समय: बिग बैंग के लगभग 66 करोड़ वर्ष बाद
  • मुख्य विषय: प्रारंभिक ब्रह्मांड, ब्लैक होल और Little Red Dots
  • संभावित महत्व: महाविशाल ब्लैक होल के प्रारंभिक निर्माण एवं तीव्र विकास को समझने में सहायता 

निष्कर्ष 

  • रोहन नायडू के नेतृत्व में हुई यह खोज प्रारंभिक ब्रह्मांड की हमारी समझ को नया आयाम देती है। ‘ब्लैक होल स्टार की अवधारणा यह संकेत देती है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में ब्लैक होल अत्यधिक घने गैस के आवरण में तेजी से विकसित हो सकते थे। हालांकि इस वस्तु की प्रकृति और इसके निर्माण की प्रक्रिया को पूरी तरह समझने के लिए आगे और अवलोकन तथा शोध आवश्यक हैं।