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वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति SOFI: 2026 (UPSC/RAS/PSI)

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केंद्रित विषय:स्वस्थ आहार की उच्च लागत को समझना और उसका समाधान करना

जारीकर्ता

  • खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO),
  • अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD),
  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF),
  • विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP)
  • तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई।

 वैश्विक भूख एवं खाद्य असुरक्षा

  • वर्ष 2025 में वैश्विक आबादी का 7.8% (लगभग 64.5 करोड़ लोग) भूख से प्रभावित रहे।
  • यह वर्ष 2024 के 8.1% और वर्ष 2022 के 8.6% की तुलना में कमी दर्शाता है।
  • वर्ष 2025 में भूख से प्रभावित लोगों की संख्या वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 1.4 करोड़ तथा वर्ष 2022 की तुलना में 4.3 करोड़ कम रही।
  • इसके बावजूद यह संख्या वर्ष 2019 के महामारी-पूर्व स्तर से लगभग 6.1 करोड़ अधिक है।
  • विश्व में लगभग 2.7 अरब लोग पौष्टिक एवं संतुलित भोजन खरीदने में असमर्थ हैं।
  • स्वस्थ आहार की औसत लागत बढ़कर 4.28 PPP डॉलर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन हो गई है।
  • वैश्विक स्तर पर लगभग 2.1 अरब लोग (25.8%) मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षा की दर 30%, जबकि शहरी क्षेत्रों में लगभग 22% है।

अफ्रीका बना वैश्विक भूख का नया हॉटस्पॉट

  •  SOFI 2026 की सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इतिहास में पहली बार अफ्रीका में भूख से प्रभावित लोगों की संख्या एशिया से अधिक हो गई है। 
  • अफ्रीका: लगभग 30.9 करोड़ लोग, यानी 20% आबादी।
  • एशिया: लगभग 29.2 करोड़ लोग, यानी 6% आबादी।
  •  वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर 51–52 करोड़ लोगों के भुखमरी से प्रभावित रहने का अनुमान है। इनमें लगभग 56% आबादी अफ्रीका में होगी।

भारत से संबंधित प्रमुख आँकड़े 

  • भारत में दीर्घकाल में कुपोषण की स्थिति में सुधार हुआ है। 
  • 2004–06: लगभग 24.39 करोड़ (21.1%) लोग कुपोषित।
  • 2023–25: लगभग 14.25 करोड़ (9.8%) लोग कुपोषित। 

भारत में बाल स्वास्थ्य के प्रमुख आँकड़े

संकेतक वर्तमान स्थिति पूर्व स्थिति
वेस्टिंग 5 वर्ष से कम बच्चे: 18.7%
स्टंटिंग 5 वर्ष से कम बच्चे: 32.9% 2012 में 41.7%
ओवरवेट 5 वर्ष से कम बच्चे: 3.7% 2012 में 2.1%
वयस्क मोटापा 8.0% 2012 में 4.0%
महिलाओं में एनीमिया (15–49 वर्ष) 53.8% 2012 में 50.1%

मुख्य निष्कर्ष

  •  भारत में कुपोषण और स्टंटिंग में कमी आई है, लेकिन बाल वयस्क मोटापा तथा महिलाओं में एनीमिया जैसी पोषण संबंधी चुनौतियाँ अभी भी गंभीर बनी हुई हैं।
  • जारी तिथि: 21 जुलाई 2026