Menu

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) में नई नियुक्तियाँ (UPSC/RAS/PSI)

Read in:

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में, हरजीत सिंह ग्रेवाल ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के नए अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया है। 
  • प्रमुख नियुक्तियाँ 
  • अध्यक्ष: हरजीत सिंह ग्रेवाल।
  • उपाध्यक्ष: एस. मुनावरी बेगम (20 जुलाई, 2026 को पदभार ग्रहण किया)।
  • ईसाई समुदाय के प्रतिनिधि (सदस्य): ग्लेन सूज़ा टिकलो (ये 2012 से 2022 तक गोवा विधानसभा के सदस्य रहे हैं)।
  • अन्य सदस्य: बर्जिस देसाई (पारसी समुदाय के प्रतिनिधि , प्रतिष्ठित वकील और लेखक, 10 मार्च, 2026 को शामिल हुए)।
  • राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
  • निकाय की प्रकृति : सांविधिक निकाय (Statutory Body) । 
  • स्थापना: केंद्र सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992' के तहत ।
  • संरचना: एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पाँच अन्य सदस्य होते हैं (कुल 7 सदस्य)। अधिनियम के अनुसार, यह अनिवार्य है कि आयोग के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदायों से ही होने चाहिए।
  • नियुक्ति: आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा । 
  • कार्यकाल: 3 वर्ष ।
  • संबंधित मंत्रालय: यह आयोग 'अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय' के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • आयोग के प्रमुख कार्य और उद्देश्य
  • अल्पसंख्यकों के विकास और प्रगति का मूल्यांकन करना।
  • संविधान और संसद/राज्य विधानसभाओं द्वारा बनाए गए कानूनों में अल्पसंख्यकों के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों के कामकाज की निगरानी करना।
  • अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित होने के संबंध में विशिष्ट शिकायतों पर गौर करना और संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामले को उठाना।
  • समावेशी शासन को मजबूत करना और समान अवसर को बढ़ावा देना।
  • अधिसूचित अल्पसंख्यक : भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर 6 समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है। मूल रूप से 1993 में 5 समुदायों (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी) को अधिसूचित किया गया था। वर्ष 2014 में जैन समुदाय को छठे अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में शामिल किया गया।
  • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान में 'अल्पसंख्यक' शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन संविधान का अनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण) और अनुच्छेद 30 (शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार) विशेष रूप से धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।