उत्तर :-
पश्चिमी विक्षोभ के मौसम संबंधी महत्व-
- शीतकालीन वर्षा एवं हिमपात- पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी भारत में शीतकालीन वर्षा एवं हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात का प्रमुख स्रोत एवं भूजल पुनर्भरण तथा नदी तंत्र के पोषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका ता है। उत्तर-पश्चिम भारत की लगभग 30% वार्षिक वर्षा शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभों से प्राप्त होती है।
- मानसूनी वर्षा पर प्रभाव- पश्चिमी विक्षोभ भारतीय मानसून के आगमन एवं प्रगति को प्रभावित करते हैं। इनके कारण वर्षा के प्रतिरूपों में परिवर्तन हो सकता है, जिससे भारत तथा पड़ोसी देशों में सूखा या बाढ़ जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- कृषि पर प्रभाव- पश्चिमी विक्षोभ के समय एवं तीव्रता में परिवर्तन से रबी फसलों की बुवाई और कटाई प्रभावित होती है। बेमौसम वर्षा फसलों को नुकसान पहुँचाकर कृषि उत्पादन में कमी ला सकती है। जैसा कि 2022-23 में गेहूँ उत्पादन पर देखा गया।
- वायु गुणवत्ता पर प्रभाव- ये वायुमंडलीय परिस्थितियों को प्रभावित कर वायु प्रदूषण एवं धुंध की स्थिति को बढ़ाते हैं। शीतकाल में इनके कारण वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी जाती है।
- तापमान एवं वर्षा प्रतिरूपों पर प्रभाव- पश्चिमी विक्षोभ वर्षा एवं हिमपात के माध्यम से तापमान में कमी लाते हैं तथा वर्षा के प्रतिरूपों को प्रभावित करते हैं, जिससे जलभराव एवं मृदा अपरदन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।