उत्तर:
- भारतीय संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना) को एक "सामाजिक अनुबंध" (सोशल कॉन्ट्रैक्ट) को प्रतिबिंबित करने के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि यह उन मौलिक सिद्धांतों और उद्देश्यों को स्पष्ट करती है जो भारतीय राज्य के आधार और सरकार तथा उसके नागरिकों के बीच संबंधों का निर्माण करते हैं।
पारस्परिक सहमति ...
- प्रारंभिक वाक्यांश "हम, भारत के लोग" और समापन वाक्यांश "एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं" यह दर्शाते हैं कि उद्देशिका भारतीय लोगों के बीच एक सामाजिक अनुबंध है।
- राज्य की प्रकृति का निर्धारण: लोग एक सम्प्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य शासन की स्थापना करते है।
- राज्य के कर्तव्यों का निर्धारण : न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक), स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना), और समता (प्रतिष्ठा और अवसर की) प्रदान करना।
- एक अत्यधिक विविधतापूर्ण समाज में, सभी समुदायो में बंधुता को बढ़ावा देकर व्यक्ति की गरिमा,राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुरक्षित रखना।
- सरकार की शक्ति और प्राधिकार नागरिकों से उत्पन्न होते हैं अर्थात् भारतीय संविधान लोगों की सामूहिक इच्छा और सहमति का परिणाम है, जो सामाजिक अनुबंध के इस विचार को प्रतिबिंबित करता है कि सरकार का अस्तित्व लोगों के हितों की सेवा करने के लिए है।
एन.ए. पालकीवाला का कथन ...
- "उद्देशिका (प्रस्तावना) संविधान का पहचान पत्र है... यह राज्य और उसके नागरिकों के बीच एक पवित्र अनुबंध का प्रतिनिधित्व करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि अंतिम संप्रभुता हमेशा 'हम, भारत के लोग' में निहित रहे।"