उत्तर-
- निर्वाचन आयुक्त को अपने पद से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया [महाभियोग, अनु. 124 (4)] के समान संसद के द्वारा ही हटाया जा सकता है।
- सर्वप्रथम लोकसभा के 100 या राज्यसभा के 50 सदस्य हस्ताक्षर कर राष्ट्रपति से हटाने की प्रार्थना की जाती है।
- इसके पश्चात् सभापति या अध्यक्ष ऐसे प्रस्ताव को ग्रहण कर सकता है या ग्रहण करने से इंकार कर सकता है।
- प्रस्ताव के ग्रहण किये जाने की स्थिति में एक तीन सदस्य जाँच समिति का गठन किया जाता है-
- उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या अन्य न्यायाधीश।
- उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों में से एक।
- एक विशेषज्ञ या विधिवेत्ता।
- समिति द्वारा निर्वाचन आयुक्त कदाचार का दोषी या समर्थता से ग्रस्त पाया जाता है तो प्रस्ताव उस सदन में प्रस्तुत किया जाता है, जिस सदन में यह मामला लम्बित है।
- संसद के उस सदन के कुल सदस्यों के बहुमत एवं उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से इस प्रस्ताव को पारित कर दूसरे सदन में भेजा जाता है और वहाँ भी इसी रीति से पारित कर राष्ट्रपति को भेजा जाता है।
- राष्ट्रपति जिस दिन उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करता है उस दिन से राज्य निर्वाचन आयुक्त पद से पदच्युत माना जाता है।