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विक्रम-1 मिशन : भारत का पहला निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल (UPSC/RAS/PSI)

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चर्चा में क्यों ?

  • 18 जुलाई 2026 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने 'विक्रम-1' का सफल प्रक्षेपण कर भारत का पहला निजी (Privately Developed) ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया। इस उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।

प्रमुख बिंदु

1. विक्रम-1

  • भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल (Orbital Launch Vehicle)।
  • डेवलपर: स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace)।
  • लॉन्च स्थल: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा।
  • मिशन का नाम: मिशन आगमन (Mission Aagman)
  • लक्ष्य: लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में उपग्रह स्थापित करना।

2. विक्रम-1 की प्रमुख विशेषताएँ

  • 350 किलोग्राम तक पेलोड को LEO में स्थापित करने की क्षमता।
  • लगभग 22 मीटर ऊँचा प्रक्षेपण यान।
  • भारत का पहला पूर्ण कार्बन-कम्पोजिट ऑर्बिटल रॉकेट।
  • 100% 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन।
  • Ultra-Low Shock Pneumatic Separation System।
  • स्वदेशी प्रोपल्शन, एवियोनिक्स, टेलीमेट्री, नेविगेशन एवं फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम।

3. मिशन की विशेष उपलब्धियाँ

  • भारतीय एवं विदेशी ग्राहकों के Commercial Payloads का प्रक्षेपण।
  • Experimental Technology Demonstration Payloads का सफल परीक्षण।
  • भारत की निजी लॉन्च सेवाओं पर वैश्विक विश्वास में वृद्धि।
  • भारत की Commercial Space Launch क्षमता का प्रदर्शन।

2020 के अंतरिक्ष सुधार

  • वर्ष 2020 में भारत सरकार ने निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोल दिया।

प्रमुख संस्थाएँ

(i) IN-SPACe: Indian National Space Promotion and Authorization Centre

कार्य

  • निजी कंपनियों को अनुमति देना।
  • ISRO की सुविधाओं तक पहुँच उपलब्ध कराना।
  • निजी अंतरिक्ष गतिविधियों का नियमन एवं प्रोत्साहन।

(ii) NSIL

  • NewSpace India Limited
  • ISRO की तकनीकों का व्यावसायीकरण।
  • लॉन्च सेवाओं एवं उपग्रह सेवाओं का विपणन।

(iii) ISRO

  • अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास।
  • उन्नत अंतरिक्ष मिशनों का संचालन।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की वर्तमान स्थिति

  • 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप।
  • भारत का पहला स्पेस यूनिकॉर्न
  • स्पेस अर्थव्यवस्था लगभग 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर।
  • लक्ष्य: अगले दशक में 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर की स्पेस अर्थव्यवस्था।

भारत के लिए महत्व

1.आर्थिक महत्व

  • वैश्विक Commercial Launch Market में भारत की मजबूत उपस्थिति।
  • विदेशी निवेश एवं निजी निवेश को बढ़ावा।
  • उच्च-तकनीक विनिर्माण में वृद्धि।

2.रणनीतिक महत्व

  • आत्मनिर्भर भारत को मजबूती।
  • निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष क्षमता में वृद्धि।
  • वैश्विक स्पेस पावर के रूप में भारत की प्रतिष्ठा।

3.वैज्ञानिक महत्व

  • स्वदेशी तकनीकों का विकास।
  • उन्नत लॉन्च प्रणालियों का निर्माण।
  • नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहन।