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भारत में साइबर अपराध प्रबंधन और I4C की पहलें (UPSC/RAS/PSI)

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चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में गृह मंत्रालय (MHA) ने देश में साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए कई तकनीकी और संस्थागत तंत्रों की प्रगति रिपोर्ट राज्यसभा में साझा की है। इनमें 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) द्वारा संचालित विभिन्न मॉड्यूल और पोर्टल्स के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने में मिली सफलता प्रमुख है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)

  • गृह मंत्रालय ने देश में सभी तरह के साइबर अपराधों से निपटने के लिए I4C को एक संबद्ध कार्यालय (Attached Office) के रूप में स्थापित किया है।

I4C के तहत प्रमुख डिजिटल पहलें 

1. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)

  • वेबसाइट (CyberCrime) के माध्यम से लोग साइबर अपराधों की रिपोर्ट कर सकते हैं।

  • इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

  • ज्ञात हो कि भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं (जैसे हैकिंग, मैलवेयर) पर प्रतिक्रिया देने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी CERT-In (कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम-इंडिया) है, जबकि I4C विशेष रूप से 'साइबर अपराध' और कानून प्रवर्तन समन्वय पर केंद्रित है।

2. नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS)

  • इसे 2021 में लॉन्च किया गया था। वित्तीय धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्ट करने और पैसे की निकासी रोकने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930 शुरू किया गया है।

  • वित्तीय संस्थानों के साथ API (Application Programming Interface) एकीकरण के जरिए धोखाधड़ी वाली रकम को तुरंत ब्लॉक किया जाता है।

  • नए मॉड्यूल: अप्रैल 2026 से पीड़ितों को पैसे वापस दिलाने के लिए 'मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल' और खातों से 'लियन मार्किंग' (Lien Marking - खाते पर रोक) हटाने के लिए 'ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल' शुरू किए गए हैं।

3. समन्वय (Samanvaya) और प्रतिबिंब (Pratibimb) प्लेटफॉर्म

  • समन्वय: यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) के लिए एक मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (MIS) और डेटा रिपॉजिटरी है। यह अंतर-राज्यीय साइबर अपराधों के लिंक का विश्लेषण करता है।

  • प्रतिबिंब: यह एक मैपिंग मॉड्यूल है जो अपराधियों और अपराध से जुड़े बुनियादी ढांचे की भौगोलिक लोकेशन को मैप पर दिखाता है। इसके जरिए हजारों गिरफ्तारियां संभव हो पाई हैं।

4. सहयोग (Sahyog) पोर्टल

  • इसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया तेज करने के लिए लॉन्च किया गया है, ताकि अवैध जानकारी/लिंक को तुरंत हटाया जा सके।

  • अतिरिक्त जानकारी: IT एक्ट की धारा 79 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सिद्धांत से संबंधित है, जो सोशल मीडिया और आईटी मध्यस्थों को तीसरे पक्ष के डेटा (यूजर कंटेंट) के लिए कानूनी देयता से छूट देती है, बशर्ते वे सरकारी आदेश (Take-down notice) मिलने पर त्वरित कार्रवाई करें।

5. सस्पेक्ट रजिस्ट्री (Suspect Registry) और म्यूल अकाउंट

  • बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से साइबर अपराधियों के पहचानकर्ताओं का डेटाबेस तैयार किया गया है।

  • इसमें 32.08 लाख से अधिक ‘लेयर 1 म्यूल अकाउंट' चिह्नित किए गए हैं। 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) वे बैंक खाते होते हैं (अक्सर निर्दोष या लालच में आए व्यक्तियों के) जिनका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा अवैध रूप से प्राप्त धन को प्राप्त करने और ट्रांसफर (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया जाता है।

संस्थागत और क्षमता निर्माण प्रयास 

  • साइबर धोखाधड़ी रोकथाम केन्द्र (CFMC): I4C में स्थापित इस केंद्र में बैंक, पेमेंट एग्रीगेटर्स, टेलीकॉम और कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) के प्रतिनिधि एक साथ मिलकर काम करते हैं।

  • संयुक्त साइबर समन्वय टीमें (JCCT): देश भर के 7 प्रमुख साइबर अपराध हॉटस्पॉट्स (जैसे मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, आदि) के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।

  • N-DISC (नेशनल-डिजिटल इन्वेस्टीगेशन सपोर्ट सेंटर): नई दिल्ली (2019) और असम (2025) में स्थापित यह केंद्र जांच अधिकारियों को साइबर फोरेंसिक सहायता प्रदान करता है।

  • CCPWC योजना: 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध की रोकथाम' योजना के तहत राज्यों को फोरेंसिक लैब और प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता (132.93 करोड़ रुपये) दी गई है। इस योजना को मुख्य रूप से 'निर्भया फंड' (Nirbhaya Fund) द्वारा वित्तपोषित किया जाता है।

  • वर्तमान में 07 केन्द्रीय फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (CFSL) और 28 राज्य फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (SFSL) कार्यरत हैं।

  • अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ: भारत अभी तक साइबर अपराध पर एकमात्र बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय बहुपक्षीय संधि 'बुडापेस्ट कन्वेंशन' (Budapest Convention on Cybercrime) का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। भारत का तर्क है कि इसे उसकी भागीदारी के बिना तैयार किया गया था। इस परिप्रेक्ष्य में I4C जैसी स्वदेशी संस्थाओं का निर्माण भारत की संप्रभु साइबर सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)

  • I4C योजना को अक्टूबर 2018 में मंजूरी दी गई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

  • 1 जुलाई 2024 से आई4सी को गृह मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है।

आई4सी के उद्देश्य

  • देश में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए एक नोडल प्वाइंट के रूप में कार्य करना।

  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ किए जाने वाले साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए।

  • साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों को आसानी से दर्ज करने और साइबर अपराध के रुझानों और पैटर्न की पहचान करने में सहायता प्रदान करना।

  • साइबर अपराध की रोकथाम और पता लगाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करना।

  • साइबर अपराध की रोकथाम के बारे में जनता में जागरूकता पैदा करना।

  • साइबर फोरेंसिक, जांच, साइबर स्वच्छता, साइबर अपराध विज्ञान आदि क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों, लोक अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों की क्षमता निर्माण में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सहायता करना।