- खगोलविदों ने एक ऐसे असाधारण चट्टानी एक्सोप्लैनेट की पहचान की है, जिसका द्रव्यमान पृथ्वी से लगभग 23 गुना अधिक है। लगभग 170 मिलियन वर्ष (17 करोड़ वर्ष) पुराने इस ग्रह को ‘Mega-Earth’ कहा जा रहा है। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका अस्तित्व ग्रहों के निर्माण और विकास से जुड़े पारंपरिक वैज्ञानिक सिद्धांतों के सामने नई चुनौती प्रस्तुत करता है।
क्या है Mega-Earth?
- Mega-Earth ऐसे अत्यधिक विशाल चट्टानी ग्रहों को कहा जाता है, जिनका द्रव्यमान पृथ्वी से कई गुना अधिक होता है, लेकिन वे गैस दानव (Gas Giant) नहीं होते।
- हालिया अध्ययन में पहचाना गया एक्सोप्लैनेट GJ 523b पृथ्वी से लगभग 23 गुना अधिक भारी और लगभग 2.55 गुना अधिक त्रिज्या वाला है। यह अपने मूल तारे की परिक्रमा लगभग 17.75 दिनों में पूरी करता है।
- यह ग्रह पृथ्वी से लगभग 87 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है।
ग्रह निर्माण के सिद्धांत को चुनौती क्यों?
- ग्रह निर्माण के लिए प्रचलित Core Accretion Model के अनुसार, ग्रह के निर्माण के शुरुआती चरण में धूल और चट्टानी पदार्थ आपस में जुड़कर एक ठोस कोर बनाते हैं।
- जब किसी ग्रह का कोर लगभग 10–20 पृथ्वी द्रव्यमान के आसपास पहुँच जाता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण आसपास मौजूद हाइड्रोजन और हीलियम जैसी हल्की गैसों को तेजी से आकर्षित कर सकता है। इससे ग्रह के चारों ओर मोटा गैसीय आवरण बनना शुरू होता है और अंततः वह गैस दानव में परिवर्तित हो सकता है।
- लेकिन GJ 523b का द्रव्यमान लगभग 23 पृथ्वी के बराबर होने के बावजूद यह मुख्यतः चट्टानी ग्रह दिखाई देता है।
- यही इसकी सबसे बड़ी वैज्ञानिक विशेषता है।
वैज्ञानिकों के सामने प्रमुख प्रश्न
- इस ग्रह की खोज से वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इतना भारी चट्टानी ग्रह गैस दानव में परिवर्तित हुए बिना कैसे अस्तित्व में रहा।
⇒ इसके पीछे संभावित कारणों में शामिल हैं—
1. Atmospheric Stripping
- ग्रह के प्रारंभिक वायुमंडल को उसके तारे से निकलने वाले तीव्र विकिरण ने धीरे-धीरे अंतरिक्ष में नष्ट कर दिया हो।
2. विशाल ग्रह-टक्कर
- संभव है कि दो बड़े आदिग्रहों (Protoplanets) के बीच हुई भीषण टक्कर से एक अत्यधिक विशाल चट्टानी ग्रह बना हो और इस प्रक्रिया में उसका अधिकांश गैसीय आवरण समाप्त हो गया हो।
3. विशेष निर्माण-परिस्थितियाँ
- यह भी संभव है कि ग्रह का निर्माण ऐसे क्षेत्र में हुआ हो जहाँ चट्टानी एवं भारी पदार्थों की उपलब्धता अधिक थी, जबकि हल्की गैसों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम थी।
अध्ययन में आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक की भूमिका
- इस तरह के दूरस्थ एक्सोप्लैनेट का अध्ययन आधुनिक खगोलीय उपकरणों की सहायता से किया जाता है। इस क्षेत्र में NASA का Transiting Exoplanet Survey Satellite (TESS) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- इसके अतिरिक्त पृथ्वी आधारित दूरबीनों तथा James Webb Space Telescope (JWST) जैसी अत्याधुनिक वेधशालाओं की सहायता से ग्रह के आकार, द्रव्यमान, वायुमंडल तथा संरचना का अध्ययन किया जा सकता है।
महत्व
- यह खोज केवल खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रह निर्माण, एक्सोप्लैनेट, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से जुड़े प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
UPSC/RAS में संभावित प्रश्न:
प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहा ‘Mega-Earth’ किससे संबंधित है?
उत्तर: अत्यधिक विशाल एवं घना चट्टानी एक्सोप्लैनेट, जिसका द्रव्यमान पृथ्वी से कई गुना अधिक होता है।
परीक्षा हेतु प्रमुख तथ्य
- GJ 523b: एक विशाल चट्टानी एक्सोप्लैनेट
- श्रेणी: Mega-Earth
- आयु: लगभग 170 मिलियन वर्ष
- द्रव्यमान: पृथ्वी का लगभग 23 गुना
- त्रिज्या: पृथ्वी की लगभग 2.55 गुना
- परिक्रमा अवधि: लगभग 17.75 दिन
- दूरी: लगभग 87 प्रकाश-वर्ष
- प्रमुख वैज्ञानिक अवधारणा: Core Accretion Model
- महत्त्व: भारी चट्टानी ग्रहों के निर्माण और गैस दानव बनने की प्रक्रिया को समझने में नई चुनौती
निष्कर्ष:
- GJ 523b जैसे ‘Mega-Earth’ की खोज यह दर्शाती है कि ग्रहों का निर्माण हमारी वर्तमान समझ से कहीं अधिक जटिल प्रक्रिया हो सकता है। यह ग्रह वैज्ञानिकों को यह पुनर्विचार करने का अवसर देता है कि किसी ग्रह के अत्यधिक भारी होने के बाद भी वह गैस दानव बनने के बजाय विशाल चट्टानी ग्रह के रूप में कैसे बना रह सकता है।
- इस प्रकार, GJ 523b न केवल एक नए एक्सोप्लैनेट की खोज है, बल्कि यह ब्रह्मांड में ग्रहों के निर्माण और उनके विकास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहेली भी है।