उत्तर -
- सवाई जयसिंह द्वितीय (1699-1743 ई.) कछवाहा वंश के सर्वाधिक प्रतिभाशाली शासकों में से एक थे। उन्होंने केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले विद्वान शासक के रूप में भी ख्याति अर्जित की। उन्होंने अश्वमेध यज्ञ करवाकर अपनी सांस्कृतिक प्रतिष्ठा स्थापित की थी।
स्थापत्य कला में योगदान
- जयपुर नगर की स्थापना
- 1727 में वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य की सहायता से 'नौ वर्गों' के सिद्धांत पर जयपुर बसाया गया। पंडित जगन्नाथ ने नगर की नींव रखी।
- नगर-नियोजन हेतु कैंटन (चीन) व बगदाद (इराक) के मानचित्रों का अध्ययन किया गया — यह भारत का प्रथम नियोजित एवं आधुनिक शहर बना।
- प्रमुख इमारतें :
- नाहरगढ़ दुर्ग (मराठों से सुरक्षा हेतु), चंद्रमहल/सिटी पैलेस (सात मंजिला), सिसोदिया रानी का महल, जलमहल
- गोविंददेव जी मंदिर (गौड़ीय सम्प्रदाय)
- फलस्वरूप 2019 में जयपुर को यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया ।
खगोल विज्ञान में योगदान
- वेधशालाय - दिल्ली (सर्वप्रथम), जयपुर (सबसे बड़ा), उज्जैन, वाराणसी व मथुरा (जयपुर 2010 में यूनेस्को सूची में शामिल)।
- सम्राट यंत्र — विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी, त्रिकोणीय आकार पृथ्वी की धुरी के समानांतर, 2 सेकंड तक सटीकता है ।
- राशिचक्र मापक यंत्र — 12 राशिफल यंत्रों से आकाशीय पिंडों की स्थिति, अक्षांश-देशांतर मापन में मदद करती है ।
- जयप्रकाश यंत्र — दो गोलार्धों के रूप में, अन्य यंत्रों की गणनाओं के सत्यापन हेतु। 1968 में इसे 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित किया गया।
सांस्कृतिक संरक्षण एवं साहित्य
- स्वयं जयसिंह ने 'जयसिंह कारिका' (ज्योतिष ग्रंथ) लिखा, जीज-ए-मुहम्मदशाही (नक्षत्र सारणी) तैयार करवाई
- दरबारी विद्वान:
- बख्तराम साह (बुद्धि विलास ), पुंडरीक रत्नाकर (जयसिंह कल्पद्रुम), पंडित जगन्नाथ (सिद्धांत कौस्तुभ, सिद्धांत सम्राट — टॉलमी के Almagest का अनुवाद, रेखागणित )।
- केवलराम (लघारिथम का संस्कृत अनुवाद), नयनचन्द्र मुखर्जी (अरबी पुस्तक 'उकर' का संस्कृत में अनुवाद)।
- विदेशी पुस्तकें मंगवाने हेतु मुहम्मद मेहरी व मुहम्मद शरीफ को भेजा गया।
- चित्रकला : - सूरतखाना नामक चित्रकला विभाग की स्थापना; चित्रकार साहिबराम तथा मोहम्मद शाह (भगवान कृष्ण के चित्र बनाए )
- सवाई जयसिंह द्वितीय ने स्थापत्य, खगोल विज्ञान, साहित्य व चित्रकला — सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य कर जयपुर को न केवल राजनीतिक अपितु वैज्ञानिक व सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया, जो आज भी यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में जीवंत है।