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विश्व निवेश रिपोर्ट 2026 (UPSC/RAS/PSI)
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- जारीकर्ता: संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD)
निष्कर्ष:
- वैश्विक FDI (2025): 1.6 ट्रिलियन डॉलर (6% वृद्धि)
- विकसित अर्थव्यवस्थाएँ: 11% वृद्धि
- विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ: 2% वृद्धि
- शीर्ष 20 मेजबान देशों को वैश्विक FDI का 80% से अधिक प्राप्त हुआ।
- निवेश मुख्यतः कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर तथा तेल एवं गैस क्षेत्रों में केंद्रित रहा।
- वैश्विक मूल्य श्रृंखला (GVC) आधारित विनिर्माण निवेश में गिरावट दर्ज की गई।
- अमेरिका
- सिंगापुर
- हांगकांग
- चीन
- ब्राजील
भारत की स्थिति
- आवक (Inward) FDI रैंकिंग: 2025 में 11वाँ(2024 में 13वाँ)
- बहिर्मुखी (Outward) FDI रैंकिंग: 2025 में 18वाँ(2024 में 20वाँ)
- देश में FDI 44 फीसदी बढ़कर 38.89 अरब डॉलर पहुंचा,
- ग्रीनफील्ड निवेश का मूल्य 2024 के 111.14 अरब डॉलर से घटकर 2025 में 74.12 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया।
- भारतीय कंपनियों ने 2025 में विदेश में 35.66 अरब डॉलर का निवेश किया। यह 2024 के 24.26 अरब डॉलर से 47 फीसदी अधिक है।
- भारतीय कंपनियों का विदेश में घोषित ग्रीनफील्ड निवेश मूल्य भी 41 फीसदी बढ़कर 25.29 अरब डॉलर पहुंच गया।
विकसित देशों की ओर निवेश बढ़ने के कारण
- निवेश निर्णय अब लागत के बजाय रणनीतिक
- प्राथमिकताओं, तकनीकी बढ़त और आर्थिक सुरक्षा पर आधारित हैं।
- सेमीकंडक्टर एवं स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारी सब्सिडी एवं प्रोत्साहन।
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक लचीला बनाने की रणनीति।
- स्थिर नीतियाँ, बेहतर तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र और कम भू-राजनीतिक जोखिम।
विकासशील देशों के लिए सुझाव
- GVC में विशिष्ट अवसरों पर ध्यान केंद्रित करें।
- डिजिटल कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा, आधारभूत संरचना और कौशल विकास में निवेश करें।
- प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (रोजगार, स्थानीय मूल्यवर्धन एवं तकनीक हस्तांतरण से जुड़े) दें।
- संप्रभु धन कोष, विकास बैंक एवं रणनीतिक निवेश कोष के माध्यम से निजी निवेश आकर्षित करें।
- क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं एवं सीमा-पार औद्योगिक गलियारों का विकास करें।