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प्रश्न: अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जलवायु एवं वर्षा के वितरण को किस प्रकार प्रभावित करती है? समालोचनात्मक विवेचना कीजिए।(150-शब्द) (UPSC/RAS)

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उत्तर:

  • अरावली पर्वतमाला राजस्थान की जलवायु और वर्षा के वितरण को निर्धारित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक कारक है। यह पर्वत श्रृंखला राज्य को दो भिन्न जलवायु प्रदेशों में विभाजित करती है।

1. वर्षा के वितरण पर प्रभाव:

  • अरावली दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा के मार्ग में अवरोध बनती है। पूर्वी ढाल पर स्थित माउंट आबू में 150 सेमी तक वर्षा होती है क्योंकि यहां मानसूनी हवाएं टकराकर ऊपर उठती हैं और संघनित होकर वर्षा करती हैं। इसके विपरीत, अरावली के पश्चिम में स्थित थार मरुस्थल "वर्षा छाया प्रदेश" बन जाता है। जैसलमेर, बाड़मेर में 10-20 सेमी से भी कम वर्षा होती है क्योंकि हवाएं शुष्क होकर उतरती हैं।

2. जलवायु पर प्रभाव:

  • अरावली मरुस्थल से आने वाली गर्म और शुष्क "लू" को पूर्वी राजस्थान में प्रवेश करने से रोकती है, जिससे पूर्वी भाग अपेक्षाकृत आर्द्र और ठंडा रहता है। वहीं पश्चिमी भाग में अत्यधिक गर्मी, कम आर्द्रता और तापमान की विषमता पाई जाती है।

समालोचना:

  • यद्यपि अरावली की औसत ऊंचाई केवल 600-900 मीटर है, फिर भी यह जलवायु विभाजक का काम करती है। लेकिन इसकी निरंतरता और ऊंचाई कम होने के कारण यह मानसून को पूरी तरह रोक नहीं पाती, जिससे पूर्वी राजस्थान में भी वर्षा अनिश्चित रहती है।

निष्कर्ष:

  • इस प्रकार अरावली राजस्थान को आर्द्र पूर्वी और शुष्क पश्चिमी दो भागों में बांटकर राज्य की संपूर्ण जलवायु को नियंत्रित करती है।