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विश्व बैंक द्वारा भारत के 'राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर कार्यक्रम' को वित्तीय सहायता

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  • चर्चा में क्यों? हाल ही में, विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत के 'राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर कार्यक्रम' को गति देने के लिए 890 मिलियन डॉलर (लगभग $89 करोड़) के वित्तीय पैकेज को मंजूरी दी है।

  • वित्तीय पैकेज का विवरण : यह वित्तीय पैकेज विश्व बैंक समूह की विभिन्न संस्थाओं और फंडों से प्राप्त होगा:

    • IBRD (इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट): $820 मिलियन का ऋण।

    • क्लीन टेक्नोलॉजी फंड (Clean Technology Fund): $60 मिलियन का रियायती ऋण।

    • लिवेबल प्लैनेट फंड (Livable Planet Fund): $10 मिलियन का अनुदान।

  • उद्देश्य और लाभ:

    • स्वच्छ ऊर्जा और रोजगार: देश के लाखों घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाकर स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करना। इससे नवीकरणीय ऊर्जा के विनिर्माण, इंस्टॉलेशन और सेवा क्षेत्र में लगभग 17 लाख (1.7 मिलियन) रोजगार पैदा होने का अनुमान है।

    • पीएम सूर्य घर योजना को बढ़ावा: यह वित्तीय सहायता केंद्र सरकार की 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगी

    • वित्तीय समावेशन: बिना किसी गिरवी के ऋण उपलब्ध कराकर मध्यम और निम्न-आय वाले परिवारों के लिए सोलर सिस्टम लगाना आसान बनाया जाएगा, जिससे उनके मासिक बिजली बिल में कमी आएगी।

  • भारत के जलवायु लक्ष्य: यह कार्यक्रम भारत के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है:

    • वर्ष 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन हासिल करना।

    • वर्ष 2035क देश के कुल बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना।

  • अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (IBRD) : 

    •  यह विश्व बैंक समूह की प्रमुख ऋणदात्री संस्था है, जो मध्यम आय वाले और साख-सक्षम गरीब देशों को ऋण और गारंटी प्रदान करती है।

    • स्थापना: 1944 (मुख्यालय: वाशिंगटन डी.सी., संयुक्त राज्य अमेरिका) 

  • क्लीन टेक्नोलॉजी फंड (CTF)

    •  यह 'क्लाइमेट इन्वेस्टमेंट फंड्स' (CIF) का एक हिस्सा है, जो विकासशील देशों में कम-कार्बन तकनीकों के प्रदर्शन, तैनाती और हस्तांतरण के लिए रियायती वित्तपोषण प्रदान करता है।

  • पिछले एक दशक में भारत की स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 500 मेगावाट से बढ़कर 27 गीगावाट (GW) से अधिक हो गई है।