उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो अध्ययन से निकटवर्ती आकाशगंगाओं में छिपी मंद ब्लैक होल गतिविधि का पता चला (UPSC/RAS)
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों सहित एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो अध्ययन के माध्यम से निकटवर्ती आकाशगंगाओं में कम सक्रिय (Low-luminosity) सुपरमैसिव ब्लैक होल की व्यापक उपस्थिति का पता लगाया है।
विशेषताएं
शोध में 280 निकटवर्ती आकाशगंगाओं का अध्ययन किया गया।
अध्ययन के लिए ई-मर्लिन (e-MERLIN) रेडियो टेलीस्कोप सरणी का उपयोग किया गया।
लगभग एक-चौथाई आकाशगंगाओं के केंद्र में सघन रेडियो उत्सर्जन पाया गया, जो कम सक्रिय सुपरमैसिव ब्लैक होल की उपस्थिति का संकेत देता है।
इन ब्लैक होल का पता पारंपरिक दूरबीनों से लगाना कठिन था क्योंकि इनकी गतिविधि अत्यंत मंद होती है।
यह निकटवर्ती आकाशगंगाओं में उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो सर्वेक्षणों में से एक सबसे व्यापक अध्ययन है।
रेडियो प्रेक्षणों को नासा की चंद्र एक्स-रे वेधशाला के एक्स-रे आँकड़ों से सत्यापित किया गया।
इससे यह सुनिश्चित हुआ कि प्राप्त रेडियो उत्सर्जन सुपरमैसिव ब्लैक होल से उत्पन्न हुआ है, न कि तारा निर्माण, सुपरनोवा अवशेष या एक्स-रे बाइनरी जैसी प्रक्रियाओं से।
अध्ययन का महत्व :
यह दर्शाता है कि कम सक्रिय ब्लैक होल स्थानीय ब्रह्मांड में पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सामान्य हैं।
ऐसे ब्लैक होल जेट (Jets) और बहिर्वाह (Outflows) के माध्यम से आसपास के वातावरण में ऊर्जा छोड़ते हैं।
इससे तारा निर्माण की दर, गैस का वितरण तथा आकाशगंगाओं के दीर्घकालिक विकास पर प्रभाव पड़ता है।
यह अध्ययन ब्रह्मांड में ब्लैक होल के विकास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।