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भारत–मलेशिया–सिंगापुर पनडुब्बी केबल प्रणाली (I2SEA) (UPSC/RAS/PSI)

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समाचार में क्यों ?

  • भारत, मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ने वाली I2SEA (भारत–सिंगापुर–दक्षिण–पूर्व एशिया) पनडुब्बी केबल प्रणाली परियोजना का अनावरण किया गया है। यह परियोजना भारत और दक्षिण–पूर्व एशिया के बीच उच्च गति तथा उच्च क्षमता वाली डिजिटल संपर्क व्यवस्था स्थापित करेगी।

प्रमुख तथ्य

  • परियोजना का नाम : I2SEA (भारत–सिंगापुर–दक्षिण–पूर्व एशिया)
  • कुल लंबाई : 3600 किलोमीटर से अधिक।
  • सेवा प्रारंभ का लक्ष्य : वर्ष 2029 की चौथी तिमाही।
  • उद्देश्य : भारत, मलेशिया और सिंगापुर के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा उच्च गति डेटा संचार के लिए आधुनिक डिजिटल अवसंरचना उपलब्ध कराना।
  • परियोजना में शामिल संस्थाएँ : माइक्रोसॉफ्ट, लाइटस्टॉर्म,सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस
  • कार्यन्वयन : जापान की NEC Corporation को इसका सिस्टम सप्लायर बनाया गया है  और सिंगापुर की ASEAN Cableship इसकी समुद्री स्थापना का काम करेगी

केबल का मार्ग

  • भारत के पूर्वी तट से प्रारंभ होगी तथा भारत में दो लैंडिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे हों
  1. मछलीपटनम (आंध्र प्रदेश) – हैदराबाद तक सबसे कम दूरी वाला समुद्री संपर्क।
  2. दक्षिण चेन्नई (तमिलनाडु)।
  • इसके बाद यह केबल कुआलालंपुर (मलेशिया) तथा सिंगापुर से जुड़ेगी।
  • यह सीधा मार्ग हैदराबाद और चेन्नई के प्रमुख डेटा केंद्रों को सिंगापुर और कुआलालंपुर (मलेशिया) के एआई हब से जोड़ेगा।

महत्व

  1. भारत, मलेशिया और सिंगापुर के बीच उच्च गति एवं कम विलंबता वाली डेटा संपर्क व्यवस्था स्थापित होगी।
  2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर तथा हाइपरस्केलर सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
  3. हैदराबाद–सिंगापुर डेटा कॉरिडोर को विश्वस्तरीय डिजिटल संपर्क प्राप्त होगा।
  4. भारत को वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल अवसंरचना केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायता मिलेगी।
  5. डिजिटल अर्थव्यवस्था, डेटा केंद्र उद्योग तथा सीमा–पार डिजिटल व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा।
  6. भारत और दक्षिण–पूर्व एशिया के बीच सामरिक तथा आर्थिक सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा।