उत्तर-
- सॉफ्ट पावर से आशय किसी राष्ट्र की उस क्षमता से है जिसके माध्यम से वह बल या दबाव के बजाय आकर्षण, सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं, शिक्षा, कूटनीति और संस्थाओं द्वारा अन्य विश्व को प्रभावित करता है। भारत की सॉफ्ट पावर उसकी प्राचीन सभ्यता, आध्यात्मिकता, लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और विकासात्मक उपलब्धियों से उत्पन्न होती है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की अवधारणा भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का नैतिक आधार प्रस्तुत करती है।
1. सभ्यतागत विरासत-
- भारत की 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता उसकी सॉफ्ट पावर का सबसे मजबूत आधार है। नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों ने एशिया भर के विद्वानों को आकर्षित किया। बौद्ध धर्म, जैन धर्म, अहिंसा और सह-अस्तित्व जैसी भारतीय दार्शनिक परंपराएँ आज भी विश्व को प्रेरित करती हैं। भारत की सभ्यतागत दृष्टि सद्भाव, बहुलवाद और वैश्विक बंधुत्व को बढ़ावा देती है।
2. योग और आध्यात्मिक कूटनीति-
- योग भारत की सबसे सफल सॉफ्ट पावर साधन के रूप में उभरा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 177 देशों के समर्थन से स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने भारत को स्वास्थ्य, मानसिक शांति, सामंजस्य और सतत जीवन शैली को बढ़ावा देने वाली सभ्यता के रूप में स्थापित किया। आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, ईशा फाउंडेशन आदि ने भारतीय अध्यात्म को वैश्विक स्तर पर प्रसारित किया है।
- “योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है।” — नरेन्द्र मोदी
3. आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान-
- आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ सांस्कृतिक कूटनीति के महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी हैं। आयुष मंत्रालय तथा जामनगर स्थित WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन ने समग्र स्वास्थ्य और निवारक चिकित्सा में भारत के वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ किया है।
4. बौद्ध कूटनीति-
- भारत बौद्ध धर्म के माध्यम से श्रीलंका, नेपाल, भूटान, जापान, थाईलैंड और ASEAN देशों के साथ संबंधों को मजबूत करता है। बौद्ध सर्किट तथा बौद्ध धरोहर स्थलों का संरक्षण भारत को बौद्ध धर्म की जन्मस्थली के रूप में प्रस्तुत करता है। बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश क्षेत्रीय सहयोग का प्रभावी माध्यम हैं।
5. बॉलीवुड और मनोरंजन-
- भारतीय सिनेमा, संगीत और नृत्य सांस्कृतिक दूत के रूप में कार्य कर रहे हैं। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और CIS देशों में भारत की सकारात्मक छवि बनाई है। दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और बाहुबली जैसी फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता प्राप्त कर भारत की सांस्कृतिक अपील को बढ़ाया है।
6. भारतीय व्यंजन और फूड डिप्लोमेसी-
- भारतीय भोजन विविधता, सततता और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक है। बिरयानी, डोसा, बटर चिकन, चाट और मसाला चाय विश्वभर में लोकप्रिय हैं। प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान GI-टैग आम, मिलेट उत्पाद, क्षेत्रीय चाय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को विश्व नेताओं को उपहार स्वरूप देकर भारत ने खाद्य कूटनीति को बढ़ावा दिया। अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर मोटे अनाजों को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
7. वस्त्र और हथकरघा कूटनीति-
- बनारसी सिल्क, कांजीवरम, बंधनी, पश्मीना, चंदेरी और खादी जैसे भारतीय वस्त्र सदियों पुरानी शिल्पकला और कलात्मक उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। महात्मा गांधी से जुड़ी खादी आत्मनिर्भरता, सततता और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है। भारत GI टैगिंग, “वोकल फॉर लोकल”, कूटनीतिक उपहारों और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के माध्यम से अपने हथकरघा विरासत को बढ़ावा दे रहा है।
8. भारतीय प्रवासी समुदाय-
- 150 से अधिक देशों में फैले 3.5 करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी भारत और विश्व के बीच सेतु का कार्य करते हैं। यह समुदाय भाषाओं, त्योहारों, अध्यात्म, भोजन और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए निवेश, तकनीक और कूटनीति में योगदान देता है। वैश्विक कंपनियों में भारतीय मूल के CEOs भारत की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को और मजबूत करते हैं।
9. खेल कूटनीति-
- खेल भारत की सॉफ्ट पावर का महत्वपूर्ण स्तंभ बनते जा रहे हैं। इंडियन प्रीमियर लीग विश्वभर के खिलाड़ियों और दर्शकों को आकर्षित करती है, जिससे क्रिकेट सांस्कृतिक संपर्क का माध्यम बना है। अफगानिस्तान और नेपाल के क्रिकेट ढाँचे को भारत द्वारा दिया गया सहयोग क्षेत्रीय सद्भाव और सहयोग को मजबूत करता है।
10. विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना-
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की उपलब्धियाँ, चंद्रयान मिशन, आधार, UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाया है। भारत का सस्ता, समावेशी और डिजिटल शासन मॉडल वैश्विक दक्षिण के लिए विकासात्मक आदर्श के रूप में देखा जा रहा है।
11. मानवीय सहायता और आपदा राहत-
- COVID-19 के दौरान वैक्सीन मैत्री, तुर्की भूकंप के बाद ऑपरेशन दोस्त, निकासी अभियान आदि ने भारत को एक संवेदनशील और जिम्मेदार शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। ये प्रयास “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को प्रतिबिंबित करते हैं।
12. हरित विकास और जलवायु नेतृत्व-
- भारत इंटरनेशनल सोलर एलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस और मिशन LiFE जैसी पहलों के माध्यम से सतत विकास में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है। भारत जलवायु न्याय, सतत जीवन शैली और हरित विकास को बढ़ावा देकर विकासशील देशों के बीच अपनी सकारात्मक छवि मजबूत कर रहा है।
13. विकास साझेदारी और वैश्विक दक्षिण नेतृत्व-
- भारत ITEC कार्यक्रमों, रियायती ऋण, अवसंरचना परियोजनाओं, डिजिटल साझेदारियों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका में अपनी विश्वसनीयता बढ़ा रहा है। भारत का विकास मॉडल समावेशी, मांग-आधारित और गैर-शोषणकारी माना जाता है।
14. “चेन्नई कनेक्ट” और सांस्कृतिक कूटनीति-
- नरेन्द्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच मामल्लापुरम में आयोजित अनौपचारिक शिखर सम्मेलन ने भारत की तमिल विरासत और भारत-चीन के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को उजागर किया। “चेन्नई कनेक्ट” ने दिखाया कि सांस्कृतिक विरासत भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी कूटनीतिक सेतु बन सकती है।
15. भक्ति-सूफी परंपरा और समावेशी संस्कृति-
- भारत की सॉफ्ट पावर बहुलवाद और सह-अस्तित्व में निहित है। संत कबीर ने कहा था- “ना मैं हिन्दू, ना मुसलमान।”
- भक्ति और सूफी परंपराओं ने प्रेम, समानता, सहिष्णुता और आध्यात्मिक एकता को बढ़ावा दिया तथा कट्टरता और सांप्रदायिकता का विरोध किया। ये परंपराएँ भारत की समन्वयकारी संस्कृति को दर्शाती हैं।
निष्कर्षतः
- भारत की सॉफ्ट पावर उसकी सभ्यतागत आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति है। योग से आयुर्वेद तक, बॉलीवुड से बौद्ध धर्म तक, भोजन से हस्तशिल्प तक, डिजिटल नवाचार से प्रवासी कूटनीति तक भारत विश्व को प्रभुत्व नहीं बल्कि आकर्षण के माध्यम से प्रभावित करता है। “वसुधैव कुटुम्बकम्”तथा भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51(A) विश्व शांति, सह-अस्तित्व, सतत विकास और वैश्विक सद्भाव की दिशा में एक मार्गदर्शक सिद्धांत प्रस्तुत करता है।
- “भारत ने हमेशा अपने विजेताओं को बदलने का अनोखा तरीका अपनाया है।” — विलियम डैलरिम्पल

