चिली स्थित वेरा सी. रुबिन वेधशाला ने लिगेसी सर्वे ऑफ स्पेस एंड टाइम (Legacy Survey of Space and Time – LSST) परियोजना की शुरुआत की है।
LSST (Legacy Survey of Space and Time)
यह 10 वर्षों तक चलने वाला विश्व का सबसे बड़ा खगोलीय सर्वेक्षण है।
इसका उद्देश्य पूरे दक्षिणी आकाश की बार-बार तस्वीरें लेकर समय के साथ होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करना है।
इससे ब्रह्मांड का विशाल डेटा संग्रह तैयार होगा, जो आने वाले दशकों तक वैज्ञानिक अनुसंधान का आधार बनेगा।
दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा
कैमरे का रिज़ॉल्यूशन लगभग 3,200 मेगापिक्सेल (3.2 गीगापिक्सेल) है।
यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा है, जिसे खगोल विज्ञान के लिए विकसित किया गया है।
कैमरा अत्यंत गहरी और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने में सक्षम है।
प्रत्येक रात लाखों खगोलीय पिंडों का अवलोकनकरेगा।
मिशन के प्रमुख उद्देश्य
छोटे क्षुद्रग्रह (Asteroids) और धूमकेतुओं की खोज।
ब्लैक होल, सुपरनोवा तथा किलोनोवा जैसी घटनाओं का अध्ययन।
दूरस्थ आकाशगंगाओं का मानचित्रण।
डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के रहस्यों को समझना।
ब्रह्मांड के विस्तार की दर तथा उसके भविष्य का अध्ययन।
गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग (Gravitational Lensing) का विस्तृत विश्लेषण।
भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका
IUCAA (Inter-University Centre for Astronomy and Astrophysics), पुणे तथा NCRA-TIA FR (National Centre for Radio Astrophysics – Tata Institute of Fundamental Research) के वैज्ञानिक इस परियोजना में सक्रिय भागीदार हैं।
भारतीय वैज्ञानिक विशेष रूप से गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग, आकाशगंगाओं के विकास तथा ब्रह्मांडीय संरचना के अध्ययन में योगदान देंगे।
वेधशाला से प्राप्त डेटा का उपयोग लगभग 20 अरब (20 Billion) आकाशगंगाओं के अध्ययन के लिए किया जाएगा।
गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग (Gravitational Lensing)
यह अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत पर आधारित घटना है।
किसी विशाल पिंड का गुरुत्वाकर्षण दूर स्थित आकाशगंगा से आने वाले प्रकाश को मोड़ देता है।
परिणामस्वरूप एक ही वस्तु की कई छवियाँ दिखाई दे सकती हैं।
इससे ब्रह्मांड की आयु, विस्तार की दर तथा डार्क मैटर के वितरण का अध्ययन किया जाता है।