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मिजोरम का प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (NHM): भारत का 21वां 'निर्दिष्ट भंडार'

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  • हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की सिफारिश पर, मिजोरम विश्वविद्यालय (आइजोल) स्थित 'प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय' (NHM) को भारत के 21वें 'निर्दिष्ट भंडार' (Designated Repository) के रूप में अधिसूचित किया है।

  • 'निर्दिष्ट भंडार' क्या है?

    • कानूनी आधार: इन्हें जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाता है।

    • कार्य: ये संस्थान प्रामाणिक जैविक नमूनों के सुरक्षित संग्रह, संरक्षण, अभिलेखीकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन का कार्य करते हैं।

    • उद्देश्य: देश की जैव विविधता का संरक्षण करना, नई प्रजातियों के 'टाइप नमूनों' को सुरक्षित रखना और भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं या पर्यावास के नुकसान की स्थिति में पारिस्थितिक पुनर्बहाली में मदद करना।

  • NHM मिजोरम का महत्व और विशेषताएं:

    • भौगोलिक अवस्थिति: वर्ष 2022 में स्थापित यह संग्रहालय 'भारत-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट' में स्थित होने के कारण विशेष रणनीतिक और पारिस्थितिक महत्व रखता है।

    • संरक्षण का दायरा: यह क्षेत्र की वनस्पतियों (जैसे टेरिडोफाइट्स और मैक्रोफंगी) और जीवों (सरीसृप, उभयचर, मछलियां, पतंगे और तितलियां) के प्रमाणित नमूनों का संरक्षण करेगा।

    • स्थानिक प्रजातियां (Endemic Species): यह भंडार मिजोरम के जंगलों में हाल ही में खोजे गए उभयचर 'लेप्टोब्राचेला तामदिल' (Leptobrachella tamdil) सहित कई स्थानिक प्रजातियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा।

    • वर्तमान क्षमता: मान्यता मिलने से पूर्व ही इस संग्रहालय ने 500 से अधिक नमूनों (हर्बेरियम शीट और जल-संरक्षित संग्रह) को सफलतापूर्वक संरक्षित कर लिया है।