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पेप्टाइड आधारित पीजोइलेक्ट्रिक जैव सामग्री (UPSC/RAS/PSI)

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चर्चा में क्यों ? 

  • CeNS बेंगलुरु, IISER कोलकाता और JNCASR बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने पेप्टाइड अणुओं के नियंत्रित स्व-संयोजन (Self-Assembly) के माध्यम से ऐसी पीजोइलेक्ट्रिक जैवसामग्री विकसित करने की नई आणविक रणनीति खोजी है, जो भविष्य में शरीर की हृदय गति, श्वसन और गति से यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलकर स्व-संचालित मेडिकल सेंसर व वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स को ऊर्जा दे सकती है।
  • पीजोइलेक्ट्रिक प्रभाव — यांत्रिक बल (दबाव, मोड़ना या खींचना) को विद्युत ऊर्जा में बदलने की क्षमता।
  • मुख्य खोज — उपयुक्त सह-विलायक की लगभग 1% मात्रा मिलाने से पेप्टाइड अणु अत्यधिक व्यवस्थित सुप्रामॉलिक्यूलर संरचना में पुनर्गठित हुए और मजबूत पीजोइलेक्ट्रिक प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई।
  • वैज्ञानिक आधार — नियंत्रित काइरल स्व-संयोजन के कारण आणविक द्विध्रुव (Molecular Dipoles) गैर-केंद्रसममितीय (Non-centrosymmetric) संरचना में व्यवस्थित होते हैं, जो पीजोइलेक्ट्रिसिटी के लिए आवश्यक है।
  • पीजोइलेक्ट्रिक गुणांक — लगभग 30 pM V⁻¹।
  • प्रमुख विशेषता — पेप्टाइड की रासायनिक संरचना बदले बिना उसके आणविक स्व-संयोजन को नियंत्रित करके पीजोइलेक्ट्रिक गुणों को सक्रिय किया गया।
  • संभावित उपयोग — मेडिकल सेंसर, बायो-सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक स्किन, वियरेबल इलेक्ट्रॉनिक्स और शरीर की गतिविधियों से ऊर्जा संचयन।
  • प्रमुख तकनीकेंAFM (Atomic Force Microscopy), FESEM (Field Emission Scanning Electron Microscopy) और Computational Simulation
  • शोध-पत्रिका — Angewandte Chemie International Edition।