Menu

तापमान शॉक से संरचनात्मक रिकवरी (UPSC/RAS/PSI)

Read in:

चर्चा में क्यों ? 

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने तापमान में अचानक बदलाव (Thermal Shock) के माध्यम से जाम/फंसे हुए सिस्टम की स्ट्रक्चरल रिकवरी को नियंत्रित करने की विधि विकसित की, जिससे भविष्य में ड्रग डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में मदद मिल सकती है।
  • मुख्य अवधारणा — कांच जैसी प्रणालियों में ठोस पदार्थों जैसी यांत्रिक विशेषताएँ लेकिन तरल जैसी अव्यवस्थित संरचना होती है तथा इनमें Memory Imprints बने रह सकते हैं।
  • स्ट्रक्चरल रिकवरी — किसी पदार्थ/संरचना का बहते हुए अपनी न्यूनतम ऊर्जा वाली अवस्था की ओर पुनः व्यवस्थित होने की प्रक्रिया।
  • प्रयोग में सामग्री — शोधकर्ताओं ने माइक्रोजेल कणों का उपयोग किया, जो अपने भार से लगभग 300–500 गुना अधिक पानी सोख सकते हैं तथा डायपर और सैनिटरी नैपकिन में उपयोग किए जाते हैं।
  • मुख्य खोज — तापमान बढ़ाने और घटाने के दौरान सिस्टम का व्यवहार Path-dependent पाया गया, अर्थात अंतिम अवस्था केवल शुरुआती और अंतिम तापमान पर नहीं बल्कि तापमान परिवर्तन के दौरान अपनाए गए रास्ते पर भी निर्भर करती है।
  • थर्मल शॉक का प्रभाव — तापमान बढ़ने की दर अचानक बढ़ाने पर माइक्रोजेल कणों ने पुनः व्यवस्था की और जाम सिस्टम कुछ समय के लिए तरल जैसी अवस्था में आ गया।
  • महत्त्व — अचानक तापमान परिवर्तन से सिस्टम की पूर्व तापीय प्रक्रिया की Memory मिटाई जा सकती है तथा असमान शिथिलता (Heterogeneous Relaxation) को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • ड्रग डिलीवरी में उपयोग — माइक्रोजेल को कम तापमान पर दवा से लोड किया जा सकता है, 34°C से ऊपर तापमान होने पर इनके सिकुड़ने से लक्षित स्थान, जैसे ट्यूमर, पर दवा छोड़ी जा सकती है।
  • लाभ — लक्षित एवं नियंत्रित दवा रिलीज से दवाओं के साइड इफेक्ट कम करने में सहायता मिल सकती है।
  • प्रमुख संस्थान — Raman Research Institute (RRI), बेंगलुरु, शोधार्थी सोनाली कवाले प्रमुख शोधकर्ता/पेपर की प्रथम लेखिका तथा रंजिनी बंद्योपाध्याय सह-लेखिका
  • शोध-पत्रिका — Journal of Colloid and Interface Science।