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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष कार्यक्रम के दौरान योजना के तहत लाभार्थियों को लगभग 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की।
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विकसित Bharat@2047 के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार ने बजट 2024-2025 में "रोजगार और कौशल के लिए प्रधानमंत्री पैकेज" के एक भाग के रूप में 'रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन' हेतु इस योजना की शुरुआत की है।
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उद्देश्य: कर्मचारियों और नियोक्ताओं को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना तथा सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाना।
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योजना की शुरुआत: 1 अगस्त 2025 से।
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कुल बजटीय आवंटन: 99,446 करोड़ रुपये।
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प्रकार: एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
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क्रियान्वयन: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (MoLE) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)।
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लक्ष्य: अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियों का सृजन करना , जिसमें 1.92 करोड़ पहली बार कार्यबल में शामिल होने वाले युवा होंगे।
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इस योजना के लाभ 01अगस्त 2025 और 31 जुलाई, 2027 के बीच सृजित नौकरियों पर लागू होंगे।
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प्रमुख विशेषताएँ (योजना के भाग):
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भाग 'A' (कर्मचारियों के लिए): ईपीएफओ (EPFO) में पंजीकृत होने वाले और 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले नए कर्मचारियों को उनके एक महीने के वेतन के बराबर (अधिकतम 15,000 रुपये तक) प्रोत्साहन राशि दो किस्तों में दी जाती है।
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भाग 'B' (नियोक्ताओं के लिए): नए रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी 3,000 रुपये प्रतिमाह का प्रोत्साहन दो वर्षों के लिए दिया जाता है।
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विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र को विशेष लाभ: रोजगार वृद्धि में विनिर्माण के महत्व को देखते हुए, इस क्षेत्र के नियोक्ताओं को यह प्रोत्साहन कुल 4 वर्षों (अतिरिक्त 2 वर्ष) तक दिया जाता है।
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कार्यप्रणाली: योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को किसी संस्थान में 6 महीने से अधिक समय तक निरंतर कार्यरत रहना अनिवार्य है।
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योजना के तहत प्रोत्साहन राशि सीधे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है। इसके लिए कर्मचारियों का EPFO में पंजीकृत होना (Universal Account Number - UAN जनरेट होना) अनिवार्य है।
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अब तक की प्रगति: इस योजना के अंतर्गत अब तक 63 लाख से अधिक कर्मचारियों को औपचारिक कार्यबल में शामिल किया गया है, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं हैं।
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15 लाख नए रोजगार अवसर सृजित हो चुके हैं।