Answer -
- भारत विश्व के चार जैव विविधता हॉटस्पॉट—हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट – श्रीलंका तथा सुंडालैंड (निकोबार द्वीप)—का हिस्सा है। इन क्षेत्रों में पाई जाने वाली समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण में राष्ट्रीय उद्यान तथा रामसर स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रीय उद्यानों की भूमिका
- मुख्यतः In-situ Conservation (प्राकृतिक आवास में संरक्षण) पर आधारित है। ये संकटग्रस्त, स्थानिक एवं दुर्लभ वन्यजीवों तथा वनस्पतियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखते हैं। साथ ही, अवैध शिकार, वन विनाश तथा मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं। राष्ट्रीय उद्यान वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता निगरानी तथा पर्यावरण शिक्षा को भी प्रोत्साहित करते हैं।
- रामसर स्थल देश की आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व रखते हैं। ये प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों तथा दुर्लभ वनस्पतियों के संरक्षण के साथ-साथ भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ये स्थानीय समुदायों की आजीविका तथा सतत पर्यटन (Eco-tourism) को भी बढ़ावा देते हैं।
राजस्थान के उदाहरण-
- रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान – बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र।
- डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान – राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध।
- केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) – यूनेस्को विश्व धरोहर एवं रामसर स्थल, प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आवास।
- सांभर झील रामसर स्थल – फ्लेमिंगो सहित अनेक जलीय पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास।
- खीचन (फलौदी क्षेत्र) – डेमोइसेल क्रेन (कुरजां) के विशाल प्रवासी समूहों के संरक्षण के लिए विश्वप्रसिद्ध; यह पक्षी संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- मेनार आर्द्रभूमि (उदयपुर) – रामसर स्थल, विविध जलीय पक्षियों का सुरक्षित आवास।
मूल्यांकन
- हालाँकि राष्ट्रीय उद्यान और रामसर स्थल जैव विविधता संरक्षण के प्रभावी साधन हैं, फिर भी जलवायु परिवर्तन, अतिक्रमण, प्रदूषण, मानव–वन्यजीव संघर्ष तथा अनियंत्रित पर्यटन जैसी चुनौतियाँ इनके सामने हैं। अतः स्थानीय समुदायों की भागीदारी, वैज्ञानिक प्रबंधन, आवास पुनर्स्थापन तथा सख्त संरक्षण कानूनों के माध्यम से इनकी प्रभावशीलता और बढ़ाई जा सकती है।
निष्कर्ष
- राष्ट्रीय उद्यान और रामसर स्थल भारत की जैव विविधता संरक्षण रणनीति के दो मजबूत स्तंभ हैं। राजस्थान के उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि वैज्ञानिक संरक्षण और जनसहभागिता के समन्वय से जैव विविधता का दीर्घकालिक संरक्षण संभव है।