भूमिका:
- इल्तुतमिश (1211–1236 ई.) गुलाम वंश का सर्वाधिक योग्य शासक था। यद्यपि दिल्ली सल्तनत की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने की, परंतु उसे स्थायित्व, वैधता एवं सुदृढ़ प्रशासनिक आधार प्रदान करने का श्रेय इल्तुतमिश को प्राप्त है। इसलिए उसे दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है।
इल्तुतमिश को वास्तविक संस्थापक कहे जाने के कारण एवं योगदान
1. सल्तनत को स्थायित्व प्रदान किया
- आंतरिक विद्रोहों एवं प्रतिद्वंद्वी तुर्क सरदारों का दमन किया।
- दिल्ली को स्थायी सत्ता केंद्र के रूप में स्थापित किया।
2. राजनीतिक एकीकरण
- बंगाल, बिहार, सिंध, रणथंभौर, ग्वालियर आदि क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया।
- दिल्ली सल्तनत की सीमाओं का विस्तार एवं एकीकरण किया।
3. वैधता (Legitimacy) प्राप्त की
- 1229 ई. में अब्बासी खलीफा से ‘मंशूर’ (Investiture) प्राप्त कर अपने शासन को धार्मिक एवं राजनीतिक वैधता दिलाई।
- इससे दिल्ली सल्तनत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ी।
4. प्रशासनिक संगठन
- इक्ता व्यवस्था को व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाया।
- केंद्रीकृत शासन प्रणाली को सुदृढ़ किया तथा अधिकारियों की नियुक्ति एवं नियंत्रण की व्यवस्था विकसित की।
5. चहलगानी (तुर्कान-ए-चहलगानी) का गठन
- 40 प्रमुख तुर्क अमीरों का शक्तिशाली समूह बनाया।
- प्रारंभ में इसने शासन को स्थिरता दी, यद्यपि बाद में यही समूह राजनीतिक अस्थिरता का कारण भी बना।
6. आर्थिक योगदान
- टंका (चाँदी) एवं जीटल (ताँबा) सिक्कों का प्रचलन किया।
- सुव्यवस्थित मुद्रा व्यवस्था से व्यापार एवं राजस्व प्रणाली को मजबूती मिली।
7. मंगोल संकट से सफलतापूर्वक निपटना
- चंगेज़ ख़ाँ के आक्रमण के समय संतुलित कूटनीति अपनाई।
- जलालुद्दीन मंगबरनी को प्रत्यक्ष समर्थन न देकर सल्तनत को विनाशकारी संघर्ष से बचाया।
8. सांस्कृतिक एवं स्थापत्य योगदान
- कुतुब मीनार का निर्माण आगे बढ़ाया।
- विद्वानों एवं सूफी संतों को संरक्षण दिया, जिससे दिल्ली सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुई।
समालोचनात्मक विश्लेषण
- सकारात्मक पक्ष: स्थिर शासन, प्रशासनिक ढाँचा, वैधता, मुद्रा सुधार एवं राजनीतिक एकीकरण।
- सीमाएँ: चहलगानी जैसी व्यवस्था भविष्य में सत्ता संघर्ष का कारण बनी तथा उत्तराधिकार की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
निष्कर्ष
- इल्तुतमिश ने केवल विजयों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि दिल्ली सल्तनत को राजनीतिक स्थिरता, प्रशासनिक सुदृढ़ता, आर्थिक आधार और वैधता प्रदान की। इसलिए इतिहासकार उसे दिल्ली सल्तनत का “वास्तविक संस्थापक” मानते हैं।
♦ इतिहासकार A. L. Srivastava के अनुसार: “यदि ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की नींव रखी, तो इल्तुतमिश उसका वास्तविक निर्माता था।”