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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेघालय के उमियाम स्थित उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) का दौरा किया- (UPSC/RAS)

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  • डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूर्वोत्तर में कृषि, आपदा प्रबंधन और संसाधन नियोजन के लिए अंतरिक्ष आधारित पहलों की समीक्षा की
  • NESAC भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एवं उत्तर पूर्व परिषद (NEC) का संयुक्त संस्थान है।
  • NESAC का मुख्यालय — उमियाम (बारापानी), मेघालय में स्थित है।
  • NESAC की स्थापना वर्ष 2000 में की गई थी।
  • NESAC का उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एवं भू-स्थानिक (Geospatial) तकनीक का उपयोग कर पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
  • NESAC भारत–म्यांमार सीमा एवं पूर्वोत्तर की अंतर-राज्यीय सीमाओं के भू-स्थानिक मानचित्रण में योगदान दे रहा है।
  • NESAC कृषि, वानिकी, जल संसाधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं आपदा प्रबंधन में अंतरिक्ष आधारित समाधान उपलब्ध कराता है।
  • NESAC की बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली (Flood Early Warning System) को और अधिक सटीक एवं स्थान-विशिष्ट बनाने पर बल दिया गया।
  • बांस मानचित्रण कार्यक्रम का उद्देश्य बांस संसाधनों का वैज्ञानिक मानचित्रण, मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना एवं आजीविका को बढ़ावा देना है।
  • 'मंज़िल एनई (Manzil NE)' डैशबोर्ड का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में भू-पर्यटन (Geo-tourism) को बढ़ावा देना है।
  • NESAC वर्तमान में लगभग 130 परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, जिनमें लगभग 50 परियोजनाएँ पूर्ण तथा 78 परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।
  • रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), ड्रोन (UAV) एवं उपग्रह संचार NESAC की प्रमुख तकनीकी क्षमताएँ हैं।
  • NESAC अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को सुशासन (Good Governance), आपदा प्रबंधन, सीमा प्रबंधन एवं सतत विकास से जोड़ने वाली प्रमुख संस्था है।
  • पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों के विकास में NESAC की महत्वपूर्ण भूमिका है।