- भारत को खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने (आत्मनिर्भर भारत विजन) और आयात निर्भरता को कम करने के लिए, भारत सरकार मुख्य रूप से दो मिशनों का कार्यान्वयन कर रही है: राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - तिलहन (NMEO-OS) और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल पाम (NMEO-OP)।
1. राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - तिलहन (NMEO-OS)
- मंजूरी: इसे 3 अक्टूबर 2024 को मंजूरी दी गई थी।
- लक्ष्य: प्राथमिक तिलहन उत्पादन को 2022-23 के 39 मिलियन टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।
- क्रियान्वयन रणनीति (क्लस्टर दृष्टिकोण): इसे 600 से अधिक वैल्यू चेन क्लस्टर के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिनका प्रबंधन किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है।
- प्रमुख पहल:
- किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का निःशुल्क वितरण (2025-26 में 10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य को पार करते हुए 13.52 लाख हेक्टेयर को कवर किया गया)।
- सीड हब (Seed Hubs) और विशिष्ट बीज भंडारण इकाइयों की स्थापना।
- उत्पादकता बढ़ाने के लिए फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन (FLD) और ब्लॉक-लेवल डेमोंस्ट्रेशन (BLD) का आयोजन।
- वर्तमान उत्पादन: कृषि विभाग के तीसरे अग्रिम अनुमान (2025-26) के अनुसार, तिलहन उत्पादन बढ़कर 43.06 मिलियन टन हो गया है।
- पीली क्रांति (Yellow Revolution): तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1980 के दशक के अंत में 'पीली क्रांति' शुरू की गई थी। NMEO उसी दिशा में एक आधुनिक और प्रौद्योगिकी-संचालित कदम (Yellow Revolution 2.0) है।
2. राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल पाम (NMEO-OP)
- शुरुआत: यह मिशन अगस्त 2021 में शुरू किया गया था।
- फोकस: इसका विशेष ध्यान पूर्वोत्तर राज्यों (North-East States) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर है। वर्तमान में यह 15 राज्यों में क्रियान्वित किया जा रहा है।
- सहायता प्रावधान:
- किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और 4 साल के गेस्टेशन पीरियड (Gestation Period) के दौरान रखरखाव के लिए इनपुट सहायता।
- पूर्वोत्तर में ऑयल पाम प्रसंस्करण मिलों की स्थापना के लिए वित्तीय मदद।
- उपलब्धियां (मार्च 2026 तक):
- ऑयल पाम की खेती का कुल क्षेत्रफल बढ़कर 6.40 लाख हेक्टेयर हो गया है।
- देशभर में 27 प्रसंस्करण मिलें संचालित हैं, जिनसे 20.10 लाख टन क्रूड पाम ऑयल (CPO) का उत्पादन प्राप्त हुआ।
- व्यवहार्यता अंतर भुगतान (VGP): किसानों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए VGP प्रदान किया जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- आयात निर्भरता और आर्थिक बोझ: भारत अपनी कुल खाद्य तेल मांग का लगभग 55-60% आयात करता है। वर्ष 2024-25 में भारत ने 160.72 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया।
- पाम ऑयल का प्रभुत्व: कुल खाद्य तेल आयात में अकेले 'पाम तेल' की हिस्सेदारी लगभग 46.77% (75.17 लाख टन) है। भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल आयात करता है।
संभावित प्रश्न:
प्रश्न: 'राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO)' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - तिलहन (NMEO-OS) का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक प्राथमिक तिलहन उत्पादन को लगभग 69.7 मिलियन टन तक बढ़ाना है।
- भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कुल खाद्य तेलों में 'सोयाबीन तेल' की हिस्सेदारी सर्वाधिक है।
- ऑयल पाम किसानों को अंतरराष्ट्रीय मूल्य अस्थिरता से बचाने के लिए मिशन के तहत 'व्यवहार्यता अंतर भुगतान (Viability Gap Payment)' का प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौनसे सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: (C)
व्याख्या:
- NMEO-OS का लक्ष्य प्राथमिक तिलहन उत्पादन को 39 मिलियन टन (2022-23) से बढ़ाकर 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन करना है।
- भारत के कुल खाद्य तेल आयात में सर्वाधिक हिस्सेदारी 'सोयाबीन तेल' की नहीं, बल्कि 'पाम तेल' (लगभग 46.77%) की है।
- NMEO-OP के तहत किसानों को क्रूड पाम ऑयल (CPO) की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखने के लिए व्यवहार्यता अंतर भुगतान (VGP) तंत्र लागू किया गया है।