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आयोजन: ('जीवेस्तल' स्थल,लेह, ज़ांस्कर घाटी )लद्दाख में 1 मई से 15 मई 2026 तक किया जा रहा है
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आयोजक: संस्कृति मंत्रालय, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के सहयोग से।
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मुख्य विषय (Theme): “टकराव के समय में शांति” (Peace in Times of Conflict)।
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तथागत का अर्थ: गौतम बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति के बाद की वह अवस्था, जिसमें उन्होंने जीवन-मरण के चक्र से पूर्ण मुक्ति प्राप्त की।
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प्रतीक: ये अवशेष बुद्ध की शिक्षाओं, आध्यात्मिक उपस्थिति के प्रतीक हैं।
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संरक्षण: इन पवित्र अवशेषों को वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में सुरक्षित रखा गया है।
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पहचान: ये अवशेष बुद्ध के सबसे पूजनीय 'पिपरहवा अवशेषों' का हिस्सा हैं।
पिपरहवा अवशेष:
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स्थल: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले में स्थित पिपरहवा स्तूप (प्राचीन कपिलवस्तु)।
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प्रथम खोज (1898): विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा।
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यहाँ एक पत्थर की मंजूषा मिली जिसमें पाँच कलश थे। इनमें हड्डियाँ, राख, रत्न और सोने की चादरें मिली थीं।
- उल्लेखनीय चीज़ों में मछली के आकार के हैंडल वाली एक स्फटिक मंजूषा और मौर्यकालीन ब्राह्मी लिपि में लिखे शिलालेख शामिल थे।
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द्वितीय खोज (1971-1977): भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के के.एम. श्रीवास्तव के नेतृत्व में।
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यहाँ बिना शिलालेख वाली दो मंजूषाओं में 22 अस्थि अवशेष मिले।
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- काल: ये अवशेष ईसा पूर्व 5वीं शताब्दी के मूल स्तूप का हिस्सा हैं, जिन्हें बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद शाक्य वंश द्वारा बनवाया गया था।
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पुष्टि: खुदाई में मिली टेराकोटा मुहरों और ब्राह्मी लिपि के शिलालेखों से सिद्ध हुआ कि पिपरहवा ही प्राचीन कपिलवस्तु है।
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महत्त्व: पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जहां भगवान बुद्ध ने अपना प्रारंभिक जीवन बिताया था I
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भारत सरकार और गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह की एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए, 30 जुलाई, 2025 को इन अवशेषों को हांगकांग से सफलतापूर्वक भारत वापस लाया गया।
हालिया अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ:
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मंगोलिया (2022): पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी।
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थाईलैंड (2024): साँची से प्राप्त बुद्ध और उनके दो शिष्यों के अवशेष।
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वियतनाम (2025): नागार्जुनकोंडा के अवशेष (सारनाथ की महाबोधि सोसाइटी द्वारा संरक्षित)।
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रूस और भूटान (2025): पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी।
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कोलंबो,श्रीलंका (फरवरी 2026): देवनीमोरी अवशेषों (बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में संरक्षित) की प्रदर्शनी।
नई दिल्ली में पिपरहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी
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उद्घाटन : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 जनवरी, 2026 को राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में किया I
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शीर्षक: ‘प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष’ (द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन)