Ans. :-
- नैनो तकनीक (1–100 nm) से पदार्थों के गुणों पर सटीक नियंत्रण संभव हो पाता है, जिसके रक्षा क्षेत्र में व्यापक अनुप्रयोग हैं। -भारत को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और रक्षा प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) के अंतर्गत नैनो मिशन के माध्यम से संस्थागत सहायता प्राप्त है।
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नैनो तकनीक की क्षमता:
- उन्नत सामग्री एवं कवच:
-हल्के और मजबूत कवच के लिए कार्बन नैनोट्यूब और ग्राफीन आधारित कंपोजिट।
उदाहरण- रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान ने अति-हल्के बुलेटप्रूफ जैकेट (BIS level-6) विकसित किए हैं। - उन्नत निगरानी तन्त्र:-
-रियल टाइम की खुफिया जानकारी के लिए नैनो सेंसर (रासायनिक/जैविक/विकिरण पहचान) और नैनो ड्रोन। - सटीक निर्देशित हथियार:
-नैनोथर्माइट और नैनो-एनर्जेटिक्स विस्फोटक क्षमता और लक्ष्य सटीकता बढ़ाते हैं। - स्टेल्थ एवं कैमोफ़्लाज:
-मेटासामग्री और नैनो कोटिंग रडार क्रॉस-सेक्शन और अवरक्त संकेतों को कम करते हैं (पनडुब्बियों, एचएएल तेजस जैसे विमानों में उपयोगी)। - ऊर्जा एवं विद्युत प्रणालियाँ:
-नैनो-आधारित लिथियम-सल्फर बैटरियाँ, सुपरकैपेसिटर और लचीले सौर सेल सैनिकों और ड्रोन विमानों की सहनशक्ति बढ़ाते हैं। - सीबीआरएन रक्षा:
-रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से बचाव के लिए नैनो तकनीक आधारित फिल्टर और सुरक्षात्मक सूट्स। - सुरक्षित संचार:
-नैनो-फोटोनिक्स, क्वांटम डॉट्स और क्वांटम एन्क्रिप्शन सुरक्षित सैन्य नेटवर्क को मजबूत बनाते हैं। -
चुनौतियाँ:
- उच्च अनुसंधान एवं विकास लागत और लंबी विकास अवधि, महत्वपूर्ण नैनो सामग्रियों के लिए आयात पर निर्भरता दोहरे उपयोग के जोखिम और नियामकीय कमियाँ आदिl
- स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और वैश्विक सहयोग से नैनो तकनीक भारत की रक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए एक शक्तिशाली कारक बन सकती है।